दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं…!
नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं
आज कितने दिनो बाद हुई यह बरसात याद दिलाती यह आपकी हर बात......
दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं…!
नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं
आज कितने दिनो बाद हुई यह बरसात याद दिलाती यह आपकी हर बात......