कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

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जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है

ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है

ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा