कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

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एक ख्याल ही तो हूँ मैं ..याद रह जाऊँ .. तो याद रखना ..वरना...सौ बहाने मिलेंगे ...भूल जाना मुझे....

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.

बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।

एक ख्याल ही तो हूँ मैं ..याद रह जाऊँ .. तो याद रखना ..वरना...सौ बहाने मिलेंगे ...भूल जाना मुझे....

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.

बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।