एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

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वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

एक नफरत ही हैं जिसे दुनिया चंद लम्हों में जान लेती हैं…वरना चाहत का यकीन दिलाने में तो जिन्दगी बीत जाती हैं।

कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

एक नफरत ही हैं जिसे दुनिया चंद लम्हों में जान लेती हैं…वरना चाहत का यकीन दिलाने में तो जिन्दगी बीत जाती हैं।

कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |