जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
फिर आज आँसुओं में नहाई हुई है रात, शायद हमारी तरह ही सताई हुई है रात।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
फिर आज आँसुओं में नहाई हुई है रात, शायद हमारी तरह ही सताई हुई है रात।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।