कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…

कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…

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उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।

बहुत अजीब हैं तेरे बाद की ये बरसातें भी, हम अक्सर बन्द कमरे में भीग जाते हैं।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!

जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!

उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।

बहुत अजीब हैं तेरे बाद की ये बरसातें भी, हम अक्सर बन्द कमरे में भीग जाते हैं।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!

जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!