बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।
बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम, ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम।
आँसू की कीमत वो क्या जाने, जो हर बात पे आँसू बहाते है, इसकी कीमत तो उनसे पूँछो, जो गम में भी मुस्कुराते है…
सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।
बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।
बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम, ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम।
आँसू की कीमत वो क्या जाने, जो हर बात पे आँसू बहाते है, इसकी कीमत तो उनसे पूँछो, जो गम में भी मुस्कुराते है…
सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।