जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

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तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।

वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।

रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।

वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।

रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।