दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
जिंदगी मे बहुत बार ऎसा वक्त आयेगा, जब आपका चाहनेवाला ही आपको रुलायेगा, मगर विश्वास रखना उसकी वफा पे, अकेले मे वो आपसे ज्यादा आँसू बहायेगा…
जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
जिंदगी मे बहुत बार ऎसा वक्त आयेगा, जब आपका चाहनेवाला ही आपको रुलायेगा, मगर विश्वास रखना उसकी वफा पे, अकेले मे वो आपसे ज्यादा आँसू बहायेगा…
जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया