जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।
दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।
दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।
दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।
चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।
दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।