मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता!!
जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।
मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता!!
जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।