जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!