चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

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मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता

कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...

मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता

कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...