में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

Share:

More Like This

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ।

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ।

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!