में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

Share:

More Like This

अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.

ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी, उस दौर से गुज़र रही हूँ जो गुजरता ही नहीं

अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.

ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी, उस दौर से गुज़र रही हूँ जो गुजरता ही नहीं