नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।
दोस्तों कभी किसी से प्यार ना करना, कभी किसी का ऐतबार ना करना, लेकर खंजर अपने ही हाथों में, यूँ अपने दिल पर कभी वार ना करना
अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।
फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।
नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।
दोस्तों कभी किसी से प्यार ना करना, कभी किसी का ऐतबार ना करना, लेकर खंजर अपने ही हाथों में, यूँ अपने दिल पर कभी वार ना करना
अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।
फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।