माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.
माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.