वक़्त अच्छा हो तो आपकी गलती भी मज़ाक लगती है और वक़्त ख़राब हो तो मज़ाक भी गलती बन जाती हैं…..

वक़्त अच्छा हो तो आपकी गलती भी मज़ाक लगती है और वक़्त ख़राब हो तो मज़ाक भी गलती बन जाती हैं…..

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कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी!

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.

कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी!

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.