कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

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लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।