अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।
काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.
हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में, कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!
तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।
काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.
हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में, कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!
तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।