गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

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फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.