आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

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वक़्त अच्छा हो तो आपकी गलती भी मज़ाक लगती है और वक़्त ख़राब हो तो मज़ाक भी गलती बन जाती हैं…..

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.

गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.

वक़्त अच्छा हो तो आपकी गलती भी मज़ाक लगती है और वक़्त ख़राब हो तो मज़ाक भी गलती बन जाती हैं…..

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.

गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.