"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
"क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।"
कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
लड़कियाँ भी मोहब्बत मे ऐसे लड़को को चाँद तारे तोड़कर लाने को कहती है, जिनको मोहल्ले मे कोई कड़ी पत्ता भी तोड़ने नही देता।
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
"क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।"
कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
लड़कियाँ भी मोहब्बत मे ऐसे लड़को को चाँद तारे तोड़कर लाने को कहती है, जिनको मोहल्ले मे कोई कड़ी पत्ता भी तोड़ने नही देता।