जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.
हर इंसान की सोच हमसे मिले ये संभव नही, पर हम उन्हें उनकी सोच के साथ स्वीकार कर सकें यहीं हमारी सही पहचान होती है...
विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है
हौसला और घोंसला मत छोड़िए बाकी सब ठीक रहेगा खुद को इतना कमजोर मत बनाना कि, दूसरों के एहसान की जरूरत पड़ने लगे
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.
हर इंसान की सोच हमसे मिले ये संभव नही, पर हम उन्हें उनकी सोच के साथ स्वीकार कर सकें यहीं हमारी सही पहचान होती है...
विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है
हौसला और घोंसला मत छोड़िए बाकी सब ठीक रहेगा खुद को इतना कमजोर मत बनाना कि, दूसरों के एहसान की जरूरत पड़ने लगे
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..