"कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था."
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
"कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था."
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....