मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
पंछी ने जब किया पंखों पर विश्वास दूर दूर तक उसका ही हो गया आकाश
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!
लोग आपके रास्ते में गड्ढे करें तो परेशान मत होना... क्योंकि ये वही लोग हैं जो आपको छलांग लगाना सिखाएंगे
मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
पंछी ने जब किया पंखों पर विश्वास दूर दूर तक उसका ही हो गया आकाश
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!
लोग आपके रास्ते में गड्ढे करें तो परेशान मत होना... क्योंकि ये वही लोग हैं जो आपको छलांग लगाना सिखाएंगे