हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..
हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..