दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता
बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
रुलाती है मगर रोने का नहीं.
दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता
बेहद हदे पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना...!!
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
रुलाती है मगर रोने का नहीं.