फिर गलतफहमियो में पड़ गया ये दिल.. वो तेरा जाते वक़्त मुस्कुराना जरुरी था क्या...

फिर गलतफहमियो में पड़ गया ये दिल.. वो तेरा जाते वक़्त मुस्कुराना जरुरी था क्या...

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मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..