जिंदगी तो सस्ती है, बस गुजारने के तरीके महँगे है!

जिंदगी तो सस्ती है, बस गुजारने के तरीके महँगे है!

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गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती

छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है

सही फैसला लेना काबिलियत नही हैं फैसला लेकर उसे सही साबित करना काबिलियत हैं

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती

छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है

सही फैसला लेना काबिलियत नही हैं फैसला लेकर उसे सही साबित करना काबिलियत हैं

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े