सितारे उन्ही के चमकते है, जो मजबूरियों का रोना रोया नही करते|

सितारे उन्ही के चमकते है, जो मजबूरियों का रोना रोया नही करते|

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सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं

लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही

एक ही समानता है पतंग और जिन्दगी में... ऊँचाई में हो तब तक ही वाह वाह होती हैं...!!!

लहज़े कब तक मीठे रखने है आजकल ये ज़रूरतें तय करती है

सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है

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आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं

लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही

एक ही समानता है पतंग और जिन्दगी में... ऊँचाई में हो तब तक ही वाह वाह होती हैं...!!!

लहज़े कब तक मीठे रखने है आजकल ये ज़रूरतें तय करती है