इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही
नम्रता से बात करना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफी मॉगना ये गुण जिसके पास हैं वो सदा सबके करीब औऱ सबके लिये खास है
जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर
मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही
नम्रता से बात करना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफी मॉगना ये गुण जिसके पास हैं वो सदा सबके करीब औऱ सबके लिये खास है
जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर
मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..