ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं