कड़ी मेहनत के बिना, मातम के अलावा कुछ भी नहीं बढ़ता है
मत भागो किसी के पीछे जो जाता है उसे जाने दो आएगा वही वापस लौट कर खुद को जऱा कामयाब तो होने दो
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.
कड़ी मेहनत के बिना, मातम के अलावा कुछ भी नहीं बढ़ता है
मत भागो किसी के पीछे जो जाता है उसे जाने दो आएगा वही वापस लौट कर खुद को जऱा कामयाब तो होने दो
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.