पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है
लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है
आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो
जीवन में किसी को रुलाकर हवन भी करवाओगे तो कोई फायदा नहीं , और अगर रोज किसी एक को भी हँसा दिया तो , आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरुरत नहीं !!
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है
लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है
आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो
जीवन में किसी को रुलाकर हवन भी करवाओगे तो कोई फायदा नहीं , और अगर रोज किसी एक को भी हँसा दिया तो , आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरुरत नहीं !!
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !