जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
किसी को अधिकार नहीं है कि वो बिना ख़ुशी पैदा किये उसका उपभोग करे .
पैसा आपके लिए खुशियाँ नहीं खरीद सकता लेकिन वो दुःख को कुछ सुखद रूप में अनुभव करा सकता है.
प्रसन्नता हम पर ही निर्भर करती है .
प्रसन्नता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप भविष्य के लिए ताल दें; ये कुछ ऐसा है जिसे आप वर्तमान के लिए डिज़ाइन करते हैं.
जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
किसी को अधिकार नहीं है कि वो बिना ख़ुशी पैदा किये उसका उपभोग करे .
पैसा आपके लिए खुशियाँ नहीं खरीद सकता लेकिन वो दुःख को कुछ सुखद रूप में अनुभव करा सकता है.
प्रसन्नता हम पर ही निर्भर करती है .
प्रसन्नता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप भविष्य के लिए ताल दें; ये कुछ ऐसा है जिसे आप वर्तमान के लिए डिज़ाइन करते हैं.