नादान इंसान ही जिंदगी का आनंद लेता है ज्यादा होशियार तो उलझा ही रहता है

नादान इंसान ही जिंदगी का आनंद लेता है ज्यादा होशियार तो उलझा ही रहता है

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प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.

दलाई लामा

छोटी छोटी बातो मे आनंद खोजना चाहिए क्योकि बङी बङी तो जीवन मे कुछ ही होती है।

प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .

रिचर्ड बैक

पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.

आपके जीवन की प्रसन्नता आपके विचारों की गुद्वात्ता पर निर्भर करती है .

मार्कस औरेलियास

प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.

दलाई लामा

छोटी छोटी बातो मे आनंद खोजना चाहिए क्योकि बङी बङी तो जीवन मे कुछ ही होती है।

प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .

रिचर्ड बैक

पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.

आपके जीवन की प्रसन्नता आपके विचारों की गुद्वात्ता पर निर्भर करती है .

मार्कस औरेलियास