जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं
खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे, अगर दुसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे, जब मनुष्य अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों का, जज बन जाता है तो फैसले नही फासले हो जाते है..
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
तकलीफ़े भी अच्छी है..
जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं
खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे, अगर दुसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे, जब मनुष्य अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों का, जज बन जाता है तो फैसले नही फासले हो जाते है..
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
तकलीफ़े भी अच्छी है..