किम्मत दोनों की चुकानी पड़ती है, बोल ने की भी और चुप रहने की भी...!!

किम्मत दोनों की चुकानी पड़ती है, बोल ने की भी और चुप रहने की भी...!!

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“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

मेरी आंखे देखकर लोग कहते हैं लगता है तेरा चाहने वाला तुझे आजमाता बहुत है

कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||

“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

मेरी आंखे देखकर लोग कहते हैं लगता है तेरा चाहने वाला तुझे आजमाता बहुत है

कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||