चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
उन पर ध्यान मत दीजिये जो आपकी पीठ पीछे बात करते है , इसका सीधा अर्थ है कि आप उनसे दो कदम आगे है
वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
उन पर ध्यान मत दीजिये जो आपकी पीठ पीछे बात करते है , इसका सीधा अर्थ है कि आप उनसे दो कदम आगे है
वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं