सुधरी हे तो बस मेरी आदते वरना मेरे शौक, वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं…!!!
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं.
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
सुधरी हे तो बस मेरी आदते वरना मेरे शौक, वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं…!!!
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं.
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।
क्रोध एक तरह का पागलपन है.