मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है.
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…
क्रोध एक तरह का पागलपन है.