"क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।"
"क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।"
जो व्यक्ति बदले की भावना रखता है वो दरअसल अपने ही घावों को हरा रखता है.
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
"क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।"
"क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है।"
जो व्यक्ति बदले की भावना रखता है वो दरअसल अपने ही घावों को हरा रखता है.
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"