अजीब सी दुनिया है, अजीब से ठिकाने है, यहाँ लोग मिलते कम है, झाकते ज्यादा है...

अजीब सी दुनिया है, अजीब से ठिकाने है, यहाँ लोग मिलते कम है, झाकते ज्यादा है...

Share:

More Like This

तन्हाईयो से इस कदर डर लगता है सफ़र ही अब तो हमसफ़र लगता है !!

गुस्सा या क्रोध समस्याओं का समाधान नही हैं बल्कि यह नई समस्याओं का जन्मदाता हैं…

"क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है |"

पाईथागोरस

क्रोध से भ्रम पैदा होता हैं, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती हैं… जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता हैं… जब तर्क नष्ट होता हैं तब व्यक्ति का पतन हो जाता हैं…

हारने वालो का भी अपना रुतबा होता हैं … मलाल वो करे जो दौड़ में शामिल नही थे..

क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…

तन्हाईयो से इस कदर डर लगता है सफ़र ही अब तो हमसफ़र लगता है !!

गुस्सा या क्रोध समस्याओं का समाधान नही हैं बल्कि यह नई समस्याओं का जन्मदाता हैं…

"क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है |"

पाईथागोरस

क्रोध से भ्रम पैदा होता हैं, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती हैं… जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता हैं… जब तर्क नष्ट होता हैं तब व्यक्ति का पतन हो जाता हैं…

हारने वालो का भी अपना रुतबा होता हैं … मलाल वो करे जो दौड़ में शामिल नही थे..

क्रोध एक स्थिति हैं, जिसमें जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती हैं…