नखरे तो सिर्फ मम्मी पापा उठाते है, दुनिया वाले तो बस ऊँगली उठाते है…
इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
क्रोध से भ्रम पैदा होता हैं, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती हैं… जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता हैं… जब तर्क नष्ट होता हैं तब व्यक्ति का पतन हो जाता हैं…
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…
नखरे तो सिर्फ मम्मी पापा उठाते है, दुनिया वाले तो बस ऊँगली उठाते है…
इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना, कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
क्रोध से भ्रम पैदा होता हैं, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती हैं… जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता हैं… जब तर्क नष्ट होता हैं तब व्यक्ति का पतन हो जाता हैं…
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…