जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
हकीकत को तलाश करना पड़ता है अफवाहें तो घर बैठे आप तक पहुँच जाती है
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
हकीकत को तलाश करना पड़ता है अफवाहें तो घर बैठे आप तक पहुँच जाती है
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"