स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें
आप,अपनी चिंताओं का आकार देखकर,अपने ईश्वर के आकार को जान सकते हो, जितनी लम्बी आपकी लिस्ट होगी, उतना छोटा आपका ईश्वर होगा
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
अपने खराब मूड के समय बुरे शब्द ना बोलें, क्योंकि.. खराब मूड को बदलने के बहुत मौके मिलेंगें पर शब्दों को बदलने के मोके नहीं...मिलेंगे
स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें
आप,अपनी चिंताओं का आकार देखकर,अपने ईश्वर के आकार को जान सकते हो, जितनी लम्बी आपकी लिस्ट होगी, उतना छोटा आपका ईश्वर होगा
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
अपने खराब मूड के समय बुरे शब्द ना बोलें, क्योंकि.. खराब मूड को बदलने के बहुत मौके मिलेंगें पर शब्दों को बदलने के मोके नहीं...मिलेंगे