मेरी बात सुन पगली अकेले हम ही शामिल नही है इस जुर्म में.... जब नजरे मिली थी तो मुस्कराई तू भी थी
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती
रिश्ते वो होते हैं जिसमे तकरार कम और प्यार ज्यादा हो जिसमे सवाल कम और विश्वास ज्यादा हो
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
मेरी बात सुन पगली अकेले हम ही शामिल नही है इस जुर्म में.... जब नजरे मिली थी तो मुस्कराई तू भी थी
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती
रिश्ते वो होते हैं जिसमे तकरार कम और प्यार ज्यादा हो जिसमे सवाल कम और विश्वास ज्यादा हो
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी