तुम दूर होकर ♥️ भी इतने अच्छे लगते हो, ना जाने पास होते तो कितने अच्छे लगते। ?
वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है
"बेबस कर दिया है, तूने अपने बस में करके......."
खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा,.,., तो खुद आज़माया होगा,.,., हमारी तो औकात ही क्या है,.,., इस इश्क़ ने खुदा को भी रुलाया होगा
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
तुम दूर होकर ♥️ भी इतने अच्छे लगते हो, ना जाने पास होते तो कितने अच्छे लगते। ?
वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है
"बेबस कर दिया है, तूने अपने बस में करके......."
खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा,.,., तो खुद आज़माया होगा,.,., हमारी तो औकात ही क्या है,.,., इस इश्क़ ने खुदा को भी रुलाया होगा
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए