जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए, बस, जिंदगी एेसे जिओ कि रब को पसंद आए...???
गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
अपनी आलोचना को धैर्य से सुनें यह हमारी ज़िन्दगी का मैल हटाने में साबुन का काम करती है !!
तुम अयोग्य या बदसूरत नहीं हो तुम्हारे पास सिर्फ पैसे या पद की कमी है।
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे
जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए, बस, जिंदगी एेसे जिओ कि रब को पसंद आए...???
गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
अपनी आलोचना को धैर्य से सुनें यह हमारी ज़िन्दगी का मैल हटाने में साबुन का काम करती है !!
तुम अयोग्य या बदसूरत नहीं हो तुम्हारे पास सिर्फ पैसे या पद की कमी है।
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे