हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है| मान लिया तो हार और अगर ठान लिया तो जीत|

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कौन चला गया ये important नही है, कौन अब भी है ये important है.

हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है

अपानी सेहत से प्रेम कीजिये वरना आप किसी से भी प्रेम करने के लायक नही रहेंगे..

कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है

कौन चला गया ये important नही है, कौन अब भी है ये important है.

हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है

अपानी सेहत से प्रेम कीजिये वरना आप किसी से भी प्रेम करने के लायक नही रहेंगे..

कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है