अपनी अमीरी के चर्चे कभी किसी से ना करे क्योंकि आपके सुख से सूखी होने वाले इस दुनिया मे आपके माता-पिता के अतरिक्त कोई तीसरा नही होग
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
अपनों से बस उतना रूठो कि आपकी बात और सामने वाले की इज्जत बरकरार रहे
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा
पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती
अपनी अमीरी के चर्चे कभी किसी से ना करे क्योंकि आपके सुख से सूखी होने वाले इस दुनिया मे आपके माता-पिता के अतरिक्त कोई तीसरा नही होग
अपनी नाकामियों को स्वीकार करो, अपनी गलतियों को देखो और सुधार करो, जिन्दगी में कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, और कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
अपनों से बस उतना रूठो कि आपकी बात और सामने वाले की इज्जत बरकरार रहे
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा
पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती