अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो
शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं वो आसानी से नहीं मिलता, लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता
अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो
शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं वो आसानी से नहीं मिलता, लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता