बगुले से एकाग्रचित्त होने की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए. जिस प्रकार बगुला अपनी समस्त क्रियाओं को त्यागकर एकाग्रचित्त हो, अपने शिकार का ध्यान करता है और मुनिजनो को बगुले के तरह श्रेष्ठ आसन अपनाना चाहिए.
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
बगुले से एकाग्रचित्त होने की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए. जिस प्रकार बगुला अपनी समस्त क्रियाओं को त्यागकर एकाग्रचित्त हो, अपने शिकार का ध्यान करता है और मुनिजनो को बगुले के तरह श्रेष्ठ आसन अपनाना चाहिए.
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं