मुर्ख व्यक्ति दुसरो को बरबाद करने की चाहत मैं इतना अँधा हो जाता है की उसको खुद के बर्बाद होने का पता ही नही चलता!

मुर्ख व्यक्ति दुसरो को बरबाद करने की चाहत मैं इतना अँधा हो जाता है की उसको खुद के बर्बाद होने का पता ही नही चलता!

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दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है

देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये

मैं सब जानता हूँ यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है।

आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है

सफ़लता का सीधा संबंध परिश्रम से है, जो व्यक्ति परिश्रम से डरता है, वह कभी सफ़लता नहीं पा सकता।

कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयम से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें,तभी आगे बढें

चाणक्य

दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है

देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये

मैं सब जानता हूँ यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है।

आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है

सफ़लता का सीधा संबंध परिश्रम से है, जो व्यक्ति परिश्रम से डरता है, वह कभी सफ़लता नहीं पा सकता।

कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयम से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें,तभी आगे बढें

चाणक्य