व्यक्ति के आचरण से उसके कुल का परिचय मिलता है. बोली से देश का पता लगता है. आदर-सत्कार से प्रेम का और शरीर से व्यक्ति के भोजन का पता लगता है.
"जब तक किसी काम को किया नहीं जाता तब तक वह असंभव ही लगता है
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
अगर सफल होने का जुनून सर पर है तो मुश्किले आप को नहीं रोक पायेगी .
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है
व्यक्ति के आचरण से उसके कुल का परिचय मिलता है. बोली से देश का पता लगता है. आदर-सत्कार से प्रेम का और शरीर से व्यक्ति के भोजन का पता लगता है.
"जब तक किसी काम को किया नहीं जाता तब तक वह असंभव ही लगता है
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
अगर सफल होने का जुनून सर पर है तो मुश्किले आप को नहीं रोक पायेगी .
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है