साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये
कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने पर एक बहुमूल्य संपत्ति विकसित होती है, जिसका नाम है
उस पछतावे के साथ मत जागिये जिसे आप कल पूरा नहीं कर सके, उस संकल्प के साथ जागिये जिसे आपको आज पूरा करना
प्रीत ना करिये पंछी जैसी जल सूखे उड़ जाए प्रीत करिये मछली जैसी जल सुखे मर जाए
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये
कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने पर एक बहुमूल्य संपत्ति विकसित होती है, जिसका नाम है
उस पछतावे के साथ मत जागिये जिसे आप कल पूरा नहीं कर सके, उस संकल्प के साथ जागिये जिसे आपको आज पूरा करना
प्रीत ना करिये पंछी जैसी जल सूखे उड़ जाए प्रीत करिये मछली जैसी जल सुखे मर जाए