पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये
जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं
जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है सिर्फ वही आपकी कामयाबी की कीमत जानते है औरों के लिए आप केवल भाग्यशाली व्यक्ति हैं।
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये
जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं
जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है सिर्फ वही आपकी कामयाबी की कीमत जानते है औरों के लिए आप केवल भाग्यशाली व्यक्ति हैं।
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.