मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे
कमियां भले ही हज़ारों हो तुममे लेकिन खुद पर विश्वाश रखो की तुम सबसे बेहतर करने का हुनर रखते हो
पहले जैसा रंग नही अब जीवन की रंगोली में ना जाने कितना ज़हर भरा है लोगो की बोली में
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!
अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे। तो जीतने वाला भी.... जीत की खुशी खो देता है। ये हैं मुस्कान की ताकत...
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे
कमियां भले ही हज़ारों हो तुममे लेकिन खुद पर विश्वाश रखो की तुम सबसे बेहतर करने का हुनर रखते हो
पहले जैसा रंग नही अब जीवन की रंगोली में ना जाने कितना ज़हर भरा है लोगो की बोली में
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!
अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे। तो जीतने वाला भी.... जीत की खुशी खो देता है। ये हैं मुस्कान की ताकत...