कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं
कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है
जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं
कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है
जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है