"अगर अपनी औकात देखनी है तो अपने बाप के पैसे का इस्तेमाल करना छोड़ दो."
निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का
राह संघर्ष की जो चलता है, वो ही संसार को बदलता है, जिसने रातों से जंग जीती है, सूर्य बनकर वही निकलता है।
जबरदस्ती मत मांगना ज़िन्दगी में किसी का साथ, जो खुद चलकर आये उसकी खुशी ही कुछ और होती है
सदैव
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
"अगर अपनी औकात देखनी है तो अपने बाप के पैसे का इस्तेमाल करना छोड़ दो."
निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का
राह संघर्ष की जो चलता है, वो ही संसार को बदलता है, जिसने रातों से जंग जीती है, सूर्य बनकर वही निकलता है।
जबरदस्ती मत मांगना ज़िन्दगी में किसी का साथ, जो खुद चलकर आये उसकी खुशी ही कुछ और होती है
सदैव
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.