रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
लक्ष्य कोई “ बड़ा ” नही हारा वही जो “ लड़ा ” नही
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो खुद अच्छे बन जाओ आपसे मिलकर शायद किसी की तालाश पूरी हो
मनुष्य को हमेशा यह नही सोचना चाहिए की वो अपने जीवन में कितना खुश है, बल्कि यह सोचना चाहिये की उस मनुष्य की वजह से दूसरे कितने खुश हैं
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
लक्ष्य कोई “ बड़ा ” नही हारा वही जो “ लड़ा ” नही
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो खुद अच्छे बन जाओ आपसे मिलकर शायद किसी की तालाश पूरी हो
मनुष्य को हमेशा यह नही सोचना चाहिए की वो अपने जीवन में कितना खुश है, बल्कि यह सोचना चाहिये की उस मनुष्य की वजह से दूसरे कितने खुश हैं