सफलता अपनी गलतियों से सीखने से मिलती है

सफलता अपनी गलतियों से सीखने से मिलती है

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मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।

ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग

अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

जो अपना आदर-सम्मान होने पर ख़ुशी से फूल नहीं उठता, और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता तथा गंगाजी के कुण्ड के समान जिसका मन अशांत नहीं होता, वह ज्ञानी कहलाता है।।

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।

ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग

अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।

गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

जो अपना आदर-सम्मान होने पर ख़ुशी से फूल नहीं उठता, और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता तथा गंगाजी के कुण्ड के समान जिसका मन अशांत नहीं होता, वह ज्ञानी कहलाता है।।

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!