संग्रहित धन का व्यय होते रहने से ही उसमें निरंतर वृद्धि सम्भव है. जैसे तालाब का पानी एक ही जगह पड़ा रहने कि वजह से दूषित हो जाता है, वह पीने योग्य नहीं रहता- इसी प्रकार यदि धन का सदुपयोग न हो तो वह किसी काम का नहीं रहता है.
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
संग्रहित धन का व्यय होते रहने से ही उसमें निरंतर वृद्धि सम्भव है. जैसे तालाब का पानी एक ही जगह पड़ा रहने कि वजह से दूषित हो जाता है, वह पीने योग्य नहीं रहता- इसी प्रकार यदि धन का सदुपयोग न हो तो वह किसी काम का नहीं रहता है.
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.