"मंजिल चाहे कितनी भी ऊंची क्यों ना हो दोस्तों !रास्ते हमेशा पैरों के नीचे होते है|"

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दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है

खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि

ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है

वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!

मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो

कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!

दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है

खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि

ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है

वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!

मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो

कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!