आप साल बदलते देख रहे हो मैंने साल भर लोगो को बदलते देखा है....

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वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.

अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…

वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.

अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…