बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
कुछ लोगो को कितना भी अपने बनाने की कोशिश कर लो वो साबित कर देते है कि वो गैर ही है |
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
कुछ लोगो को कितना भी अपने बनाने की कोशिश कर लो वो साबित कर देते है कि वो गैर ही है |
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका