खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है
क्या गिला करें उन बातों से क्या शिक़वा करें उन रातों से कहें भला किसकी खता इसे हम कोई खेल गया फिर से जज़बातों से
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है
क्या गिला करें उन बातों से क्या शिक़वा करें उन रातों से कहें भला किसकी खता इसे हम कोई खेल गया फिर से जज़बातों से
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....